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गुरुवार, 15 मार्च 2012

शत् शत् नमन स्व.राहुल शर्मा जी को विनम्र श्रद्धांजली...


एसपी स्व. राहुल शर्मा की खुदकुशी के दो दिनों बाद उनके पिता, पत्नी व परिजन खुलकर सामने आए। परिजनों ने उनकी मौत के पीछे पुलिस सिस्टम को दोषी माना है, साथ ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग शासन से की है। शर्मा के पिता आरके शर्मा ने राज्य शासन द्वारा सीबीआई जांच की घोषणा को सही ठहराया है।

उन्होंने यह भी कहा कि न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। वे मानवाधिकार आयोग से भी पूरे मामले की शिकायत करेंगे। दिवंगत एसपी की पत्नी जी.गायत्री शर्मा ने कहा कि सिस्टम में समय रहते सुधार लाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी या कर्मचारी इसका शिकार न बने। वहीं दो दिन बाद भी उनका लैपटाप नहीं मिला।
एसपी राहुल शर्मा के दादा 90 वर्षीय बसंतराम शर्मा ने कहा कि करीब 8-10 दिनों पहले उनकी अपने पोते से बात हुई थी। इस दौरान उन्होंने बताया था कि विभाग के सीनियर अफसर उन्हें काम करने नहीं दे रहे हैं। इससे वे काफी परेशान हैं। उन्होंने पोते की मौत के लिए विभाग के वरिष्ठ अफसर को दोषी करार दिया है। उन्होंने मांग की कि जो भी अधिकारी दोषी है, उसे तत्काल निलंबित कर उसके खिलाफ जुर्म दर्ज किया जाए।
ताकि कोई और शिकार न हो : गायत्री
राहुल की पत्नी जी. गायत्री शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि उनके पति सिस्टम के शिकार हुए हैं। वे जब से बिलासपुर आए थे, तब से उन्हें काम करने नहीं दिया जा रहा था। इससे वे बेहद परेशान थे। भविष्य में कोई अधिकारी या कर्मचारी डिप्रेशन में आकर ऐसा कोई कदम न उठाए, इसके लिए पुख्ता जांच और कार्रवाई की जानी चाहिए।
उनके पति ने अपने काम में दखल को लेकर कई बार उच्चधिकारियों से भी की थी,लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। एसपी को आशंका थी, गायब हो जाएगा नोट, आमतौर पर सुसाइड नोट लिखने वाला व्यक्ति उसे मृत्यु पूर्व जेब व ऐसी जगह छोड़ जाता है, जहां पुलिस या परिजनों की तत्काल नजर पड़ जाए। शर्मा को शायद आशंका थी कि बाहर होने पर उनका सुसाइड नोट गायब हो जाएगा। इसीलिए उन्होंने इसे अपने ब्रीफकेस में रखना मुनासिब समझा होगा।

संकलनकर्ता:- ब्लागर नीलकमल वैष्णव"अनिश"
:- सौजन्य(चित्र और लेख) केलो प्रवाह, देशबंधु, नवभारत और दैनिक भास्कर

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

प्रगति......


प्रगति आतंक की जननी है 
खून तो मानो आतंक है 
पर प्रगति तो धमनी है 
प्रगति ने किया बंदूकों का आविष्कार 
इंसानों ने किया अपनों का ही शिकार 
प्रगति ने ही किया परमाणु अस्त्रों का आविष्कार  
जल गया हिरोशिमा नागासाकी जिसका न कोई आधार 
प्रगति अभी खोज रही थी कैंसर का उपचार 
लो आ गया नया एड्स का भरा पूरा परिवार 
प्रगति ने ही किया है वकील अदालतों का आविष्कार 
बोफोर्स, हवाला चारा करके भी बच गई सरकार 
प्रगति का सबसे बड़ा आविष्कार तो है नोटों की लम्बी तलवार 
जिससे काटो तो ना निकले खून और बचे कातिल हर बार..... 


शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

ऐसा देश है मेरा.....

पढ़ा लिखा है यहाँ संतरी 
अशिक्षित है शिक्षामंत्री 
सुन लो ओ जग वालों 
कहता हूँ मैं खरी-खरी 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा 
जिसको घर का काज न आवे 
वो प्रदेश का राज चलावे 
जहाँ का लीडर अपनी सोचे 
और समाज का बैंड बजावे 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
भाई भतीजा वाद बहुत है 
भ्रष्टाचार आबाद बहुत है 
मानवता ईमान नहीं कुछ 
धर्म के नाम पे फसाद बहुत है 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
पत्थर पे लाखों का हार सजाते 
पर गरीब को मार भगाते 
अंधविश्वास का हाल ये देखो 
बच्चों का भी शीश चढाते 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
हम दो हमारे सौ का नारा है 
आबादी बढ़ाना ही काम प्यारा है 
लड़की उनको भी कुंवारी चाहिए 
जो खुद सौ-सौ मुंह मारा है 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
लोग चवन्नी बस यहाँ कमाते 
शाम हुई खूब पी के आते 
ज्ञान के नाम पर शून्य हैं फिर भी 
बातें बड़ी-बड़ी कर जाते 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
'हीरो' की तुम देखो बातें 
फुटपाथ पर गाडी चलते 
लोग फिर भी है उनके 'फैन'
जो लोगों को नींद में उड़ाते 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
विश्व सुंदरी भी क्या कमाल करें 
परोपकार समाज सेवा की बात करे 
पहनते ही ताज मगर वो भी 
'बॉलीवुड' की ही राह धरे 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
कहीं-कहीं हैं रातें उजली 
कहीं-कहीं हैं दिन में भी अँधेरा 
चंद लोग तो महलों में सोते 
बाकी का है फुटपाथ बसेरा 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा